[ Lesson 02 :
Tips And Tricks For Learning Spoken And Written English ]
[ पाठ 02: इंग्लिश लिखना और बोलना सीखने के लिए सुझाव और तरकीब ]
दोस्तों, मैं अपने कोर्स [ Dinesh Goswami Free English Course ( दिनेश गोस्वामी फ्री इंग्लिश कोर्स) ] के लैसन # 2 में
आपका स्वागत करता हूँ और आपसे गुजारिश करना
चाहूंगा, आपको एक सलाह देना चाहूंगा हूँ कि अगर आपने इस
लैसन से पहले के लैसेंस नहीं पढ़े हैं या ध्यान से नहीं पढ़े हैं, तो कृपया करके उन्हें
अच्छी तरह से पढ़ लें, समझ लें ! क्योंकि हर लैसन इस कोर्स का एक अहम् हिस्सा
है ! हर लैसन, इस कोर्स को सिलसिलेवार बनाता है ! इसलिए, अगर आप हर लैसन को सिलसिलेवार तरीके
से नहीं पढेंगें, या उसे अच्छी तरह से समझे बिना आगे बढ़ जाएंगे तो आप इस
कोर्स का सम्पूर्ण लाभ नहीं उठा पाएंगे ! इसलिए, मैं आपसे फिर से गुजारिश
करता हूँ कि आप इस कोर्स के हर लैसन को ध्यान से पढ़ें और जब तक आप उसे अच्छे
तरीके से समझ न लें, तब तक आगे न बढ़ें ! आपकी सुविधा के लिए मैं इस कोर्स के इंडेक्स
पेज़ का लिंक नीचे दे रहा हूँ ....
दोस्तों, जैसा कि मैंने लैसन #
1 : [ Introduction ] में
आपसे वादा किया था कि “ अगले लैसन में, मैं आपको
आपको कुछ ऐसे “सीक्रेट्स” या “ टिप्स एंड ट्रिक्स ” बताऊंगा, जिनको जानने के बाद आपका इंग्लिश लिखने और बोलने का सपना
बहुत जल्दी साकार हो जाएगा….”
तो दोस्तों, आइए शुरुवात करते हैं !
दोस्तों, मैं आप सभी को एक बात बहुत ध्यान से समझने के लिए कहूंगा कि यदि आप इस
कोर्स से 100% फायदा उठाना चाहते हैं, तो आप इस कोर्स को करते समय किसी अन्य बुक
या प्रोग्राम का सहारा न लें ! मुझे सिर्फ़ आपका १००% डेडिकेशन, डेटर्मिनेशन और
डिवोशन चाहिए, बाकि सब इस कोर्स में है ! मुझे पूरा विश्वास है कि इस कोर्स को
पूरा करने के बाद आप न केवल अच्छी इंग्लिश लिख सकेंगें बल्कि बोल भी पाएंगें !
दोस्तों, हमें एक बात का ध्यान रखना होगा कि किसी भी भाषा को सीखने के
लिए, चाहे वह हिन्दी, इंग्लिश, फ्रेंच या कोई भी अन्य भाषा हो, हमें सबसे पहले उस
भाषा के शब्द सीखने पड़ते हैं ! हम भी इंग्लिश के बहुत से शब्द जानते
हैं, उनका यूज़ भी करते हैं ! एक सामान्य व्यक्ति हिन्दी बोलते समय लगभग 10% से
40% तक इंग्लिश शब्दों का प्रयोग करता है, परंतु जब वह इंग्लिश में बात करना चाहता
है तो जितने शब्द वह जानता है, उनका भी प्रयोग नहीं कर पाता ! जानते हैं क्यों ?
इसके पीछे एक छोटी सी साइकोलॉजी है ! हिन्दी बोलते समय हमें अपने ऊपर इतना
अधिक कॉन्फिडेंस होता है कि हम अपनी हिन्दी में इंग्लिश वर्ड्स बहुत सहजता के
साथ शामिल कर लेते हैं ! हमें अपने ऊपर इतना अधिक यकीन होता है कि
बिना यह सोचे समझे कि हिन्दी व्याकरण के हिसाब से हमारा सेंटेन्स ठीक होगा भी
या नहीं, हम लगातार धारा प्रवाह हिंदी बोलते रहते हैं, और तो और कब हम उसमे इंग्लिश, उर्दू,
पंजाबी आदि दूसरी भाषा के शब्द भी सम्मलित कर लेते हैं, हमें पता ही नहीं चलता !
हमें इस बात से कोई झिझक भी नहीं होती, हमें कोई शर्म भी महसूस नहीं होती कि
इस तरह बोलने से लोग हम पर हसेंगें या हमारा मज़ाक उड़ाएंगे ! हम बिना किसी चिंता के लगातार बोलते
रहते हैं ! तो दोस्तों, हमें यही कॉन्फिडेंस, यही साइकोलॉजी इंग्लिश बोलते समय भी
अपनानी है ! अँग्रेज़ों के साथ भी ऐसा ही है, वे भी इंग्लिश बोलते
समय इंग्लिश ग्रामर के बारे में नही सोचते ! वे भी बस सहजता के साथ अपनी बात
बोलने या समझाने की कोशिश करते हैं ! हमने भी इस कोर्स में यही बताने
की, यही सिखाने की कोशिश की है कि हमें भी इंग्लिश बोलते समय हिंदी
को इंग्लिश में कन्वर्ट नहीं करना है , ग्रामर के नियमों या
रूल्स के बारे में नहीं सोचना है ! हमें इंग्लिश दिमाग़ से नहीं, सीधे ज़बान से
बोलनी है, जैसे हम हिंदी में बोलते हैं !
आइए, अब मैं आपको कुछ ऐसे सीक्रेट या टिप्स एंड ट्रिक्स बताता हूँ, जिनको जानने के बाद
आपका इंग्लिश लिखने और बोलने का सपना बहुत जल्दी साकार हो जाएगा :
1) इंग्लिश ग्रामर के रूल्स याद न
करें, न ही उनके अनुसार हिन्दी के सेंटेन्स को इंग्लिश में ट्रांसलेट करें !
2) हमेशा सबसे ईज़ी वर्ड्स का प्रयोग करें !
3) छोटे- 2 सेन्टेन्सेस से अपनी बात समझाने
की कोशिश करें !
4) अपने दिमाग़ से यह भ्रम निकाल दे कि भारी
- भरकम शब्द या लम्बे - लम्बे सेन्टेन्सेस यह दिखाते हैं कि आपकी इंग्लिश
बहुत अच्छी है ! अच्छी इंग्लिश वह है जो आपकी बात को, आपकी भावना के साथ, पढ़ने या
सुनने वाले को ईज़िली, समझा दे !
5) इंग्लिश बोलते समय इंग्लिश मुहावरों
का कम से कम प्रयोग करें !
6) सही शब्द का सही जगह पर इस्तेमाल करें !
यदि आपको किसी शब्द के अर्थ को लेकर संशय है, तो उस शब्द का इस्तेमाल न करें !
7) इंग्लिश बोलते समय इस बात का ध्यान रखें
कि सामने वाला क्या कह रहा है, या क्या पूछ रहा है, उसी
के अनुसार सिंपल इंग्लिश में अपना उत्तर देने की कोशिश करें ! याद रखें - “ लिसनिंग इज़ मोस्ट इंपॉर्टेंट ” !
8) जितनी ज़रूरत हो, उतना कहें या उतना
लिखें !
9) जो भी लिखें सुंदर और स्पष्ट हो !
लिखने के बाद, जो लिखा है, उसे एक बार पढ़ कर चैक कर लें ! कहीं कोई ग़लती तो नही
हो गयी !
10) डेली कुछ न कुछ पढ़ने की आदत डाले ! हर रोज़ कम से कम आधा घंटा रीडिंग और
एक पेज लिखने से आपकी इंग्लिश बहुत जल्दी अच्छी हो जाएगी !
11) कोई भी बच्चा जब दो या ढाई साल का हो जाता है तो उसे लिखना सिखाया जाता है
! पर वह इससे पहले से ही बातें करना जानता हैं ! ये बातें वह अपने आस पास से सुनकर
सीखता है ! इसलिए समझ लीजिए कि जब एक छोटा सा बच्चा सिर्फ़ सुनने भर से
अपनी भाषा में बात करने लग जाता है तो अगर आप डेली इंग्लिश में सुनना शुरू कर
देंगे तो आप कितना अच्छा बोल सकेंगें ! इसीलिए रोज़ आधा घंटा इंग्लिश में कुछ न कुछ
सुनने की आदत डालिए ! आप टी.वी. पर इंग्लिश न्यूज़ सुन सकते हैं या फिर कोई
इंग्लिश प्रोग्राम देख सकते हैं !
12) इंग्लिश लिखने और सुनने से भी ज़्यादा इंपॉर्टेंट है “ इंग्लिश बोलना ” !
आप इंग्लिश में जो कुछ भी सीखते हैं, ज़ोर-ज़ोर से बोले, जो कुछ भी पढ़े, आपकी
आवाज़ कम से कम इतनी तो होनी चाहिए कि आपके कानों को साफ़ -
साफ़ सुनाई दे ! इससे आपके कानों को भी इंग्लिश सुनने की आदत
पड़ेगी ! सहजता यहीं से, ऐसे ही आएगी !
13) कोशिश कीजिए, अपने आपको - ऐसे लोगों के साथ जोड़ने की जिनकी इंग्लिश
बहुत अच्छी है ! इन लोगों के साथ रहने से आपको इंग्लिश सुनने और बोलने का मौका
मिलेगा ! इससे न केवल आपकी इंग्लिश बोलने की झिझक दूर होगी, अपितु आप बहुत जल्दी
कॉन्फिडेंट्ली इंग्लिश बोलना स्टार्ट भी कर देंगे !
14) अगर इंग्लिश बोलते समय और लिखते समय आपको लगता है कि कुछ शब्द आपके दिमाग़
में या आपकी ज़बान पर एकदम से नहीं आते, तो आप उन शब्दों को एक
डायरी में लिख लें और रोज़ उन शब्दों को बोल कर या लिख कर
प्रैक्टिस करें !
15) ऐसी जगह ढूंढें, जहाँ आप बिना किसी शोर-शराबे या रुकावट के
अपनी प्रैक्टिस कर पाएं !
16) एक पुरानी कहावत है- “ रोज़ खाओ, चाहे घास खाओ ! ” इसलिए
डेली प्रैक्टिस करें ! आज तो समय ही नहीं है, कल
ज़्यादा प्रैक्टिस कर लेंगे ! यह सोच सही नहीं है !
डेली प्रैक्टिस बहुत इंपॉर्टेंट है !
दोस्तों, और भी ऐसे बहुत से “टिप्स एंड ट्रिक्स” या तरीके
हैं, जिनकी मदद से आप बहुत जल्दी अच्छी इंग्लिश लिख भी सकेंगे और
बोल भी पाएँगे ! इस कोर्स को कराते समय मैं आपको साथ - साथ सभी कुछ
सिखाता रहूंगा ! दोस्तों, इस कोर्स को कराते समय आपको बहुत सी ऐसी
बातें पता चलेंगीं जो आपको पहले से ही पता होंगी या आपको लगेगा कि यह तो बहुत आम बात है, या इस कोर्स में इन्हें एड् करने की क्या ज़रूरत थी ? दोस्तों,
अगर आपको ऐसा लगे तो आप उन चीज़ों को स्किप कर सकते हैं ! हमने यह
चीज़ें इसलिए एड् की हैं क्योंकि कुछ लोग ऐसे भी हो सकते
हैं, जिनको इन चीज़ों की नालेज न हो !
दोस्तों, अगले लैसन में, मैं आपको यह समझाऊँगा कि
“ इंग्लिश लैंग्वेज ” को सीखने की शुरुवात करने से पहले,
हमें कुछ ऐसे “ बेसिक पॉइंट्स ” समझने होंगें, जिनकी सशक्त बुनियाद पर आप अपने इंग्लिश
नॉलेज के महल की स्थापना कर सकते हैं !
[ Request ( निवेदन ) ]
दोस्तों, मैं यथा-शक्ति कोशिश करूंगा कि जितना
संभव हो सके, मैं उतने आसान तरीके से यह कोर्स आपको समझा सकूं, जिससे आप इस कोर्स से
ज्यादा से ज्यादा फायदा उठा सकें ! आप अच्छी इंग्लिश लिख और बोल पाएं ! और इस ज्ञान
का लाभ उठाते हुए अपने जीवन में निरंतर सफलता की नई उचाईयों को
हासिल करें ! फिर भी अगर आपके दिमाग में कोई प्रश्न या संशय हो तो आप मुझे मेरी
ईमेल आइडी. पर कांटेक्ट कर सकते हैं, या मेरे ब्लॉग पर “ कांटेक्ट फॉर्म ” यूज़ कर सकते
हैं !
धन्यवाद !
हार्दिक शुभकामनाओं सहित,
आपका शुभचिंतक,
दिनेश गोस्वामी
Blog
: dineshgoswamifreeenglishcourse.blogspot.com
Email :
dineshgoswamifreeenglishcourse@gmail.com